Saturday, June 21, 2008

आप मीडिया के बारे में क्या सोचते हैं ?






QUESTION:




  • आप मीडिया के बारे में क्या सोचते हैं ?


HARSHIT'S THOUGHT:



देखिये, मैं मीडिया को लोगो की बातो को रखने का एक अच्छा साधन मानता हूँ, लेकिन लोगो का आज कल मीडिया पर से दिन पर दिन विश्वास कुछ कम सा होता जा रहा है। और इसकी वजह कोई और नही ख़ुद मीडिया ही है । मीडिया छोटी से छोटी खबरों को भी बहुत बड़ा - चडा कर प्रर्दशित करता है । जो मेरे विचारो से बिल्कुल उचित नहीं है।



मैं मानता हूँ, कि मीडिया बहुत अच्छी खबरें तथा विभिन्न प्रकार की खबरों को दिखाता है । अच्छी खबरों को दिखाने के लिए वह काफी मेहनत भी करता है। मीडिया के संवाददाता कई जगह फ़ेले हैं, जो जब कोई घटना होती है तब मोके पर पहुंचकर जनता को पूरी जानकारी देते हैं । यहाँ तक की सभी चैनल कई खुलासे कर चुके हैं, जो बहुत अच्छी बात है, जिससे जनता आगाह और सावधान होती है। कई न्यूज़ चेंनलो ने तो ग्राहक बनकर खुफिया केमरों के साथ कई खुलासे किए है, जिससे वह लोग जो ग़लत व्यापार करते हैं उन्हें डर रहता है की कहीं मीडिया ग्राहक बनकर न आ जाए, और छापा न मार दें, या उनकी पोल न खोल दें । इस प्रकार इन खुलासों से ग़लत व्यापारियो को कुछ हद तक रोकने में मदद मिली है।



परन्तु फिर भी मैं मीडिया से नाराज हूँ, क्योंकि वह कम मात्रा में ही खुलासे करते हैं, और अगर मीडिया चाहे तो ना जाने कितने खुलासे करके वह ग़लत व्यापार करने वालो में इतना भय डाल सकती है, कि ग़लत व्यापारी परेशान हो जाएँ और मीडिया के डर से ग़लत व्यापार या ग़लत कार्य करना ही छोड़ दें ।



कोई भी चीज तभी अच्छी लगती है जब वो लिमिट में हो परन्तु न्यूज़ चैनल्स तो एक ख़बर के पीछे ही पड़ जाते हैं जैसे- आरुशी हत्याकांड आदि । जैसे दिखाने को कोई और ख़बर ही नहीं हो ।


मीडिया तो वह शक्ति है जिससे भ्रस्टाचार को काफी हद तक कम करने में मदद मिल सकती है । मीडिया जानती नहीं है किउसमे कितनी शक्ति है और वह क्या कर सकती है । पूरे देश में अपराधो के खिलाफ जागरूकता फेलाई जा सकती है । पर मेरे विचार से मीडिया अपनी शक्ति का पूरा फ़ायदा नहीं उठा रही है।




मीडिया में क्रिकेट -


अब आई क्रिकेट कि बात ! आप सभी तो जानते ही हो कि क्रिकेट को मीडिया ने कितना महत्त्व दे रखा है । अब आप कहे रहे होंगे, कि क्रिकेटर अपने देश का नाम रोशन करने के लिये मेहनत करते हैं , अपना देश की इज्ज़त रखने के लिये अपना पसीना बहाते हैं। परन्तु फिर क्रिकेट खेल ही क्यों ? फुटबाल, टेबल टेनिस ,शतरंज क्यों नहीं ? क्या सानिया मिर्जा अपने देश के लिये मेहनत नहीं करती । या शतरंज खेलने वाले इस देश के लिये नहीं खेलते ।



आज हमारे पास फुटबाल वर्ल्ड कप में खेलने के लिये फुटबाल टीम नहीं है क्या यह हमारे देश के लिये शर्म की बात नहीं है ?



अगर मीडिया चाहे तो क्या कुछ नही कर सकती । न्यूज़ चैनल जैसी जिम्मदारी का संभालना तो बहुत ही बड़ा सोभाग्य है । मैं मानता हूँ की अपने चैनल को चलाने के लिये TRP का होना बहुत जरूरी है परन्तु अगर आप TRP बढाना चाहतें है तो तरह तरह के खुलासे करो । एक दुसरे से प्रतियोगता करो की आज हमारे चैनल ने इतने खुलासे करें है, लोगो की समस्याएं सरकार के सामने लाओ । प्रशासन से हो रही लापरवाही दिखायो । पॉलिटिक्स से जुड़ी बातो को दिखाओ । उन पर विचार विमर्श करो ।दिखाने के लिये न जाने कितनी चीजें है पर दिखाओ तो सही । लोगो का विचार विमर्श लो।अरे अपने चैनल का भरपूर फ़ायदा लो इसका फ़ायदा पैसा कमाने के लिये नहीं इस देश के विकास के लिये करो । लोगो की शिकायतों को सामने लाओ । ज्यादा से ज्यादा खुलासे करें । छोटे से छोटे, दुखी से दुखी लोगो के दुखो को , उनके दर्द को , उनके भावो को , उनकी समस्याएँ को दिखाएँ। पुलिस को आम आदमी बनकर खुफिया केमरे के साथ रंगे हाथो रिश्वत लेते हुए पकडो ।



परन्तु मीडिया तो रियलिटी शो की ख़बरों को दिखाता रहता है। जैसे क्या आप पांचवी पास से तेज़ है के बारे में , बॉलीवुड ख़बरों के बारे में। ऐश्वर्या और अभिषेक की शादी के बारे में । क्या कभी दिखाया है की सीमा बॉर्डर पर किस प्रकार फोजी इस देश की रक्षा करते हैं ? वह तो बारिश के मोसम में लोगो से पूछने निकल जाते हैं की वह इस मोसम में कैसा अनुभव कर रहे हैं । इंडिया टीवी में राजू श्रीवास्तव की कॉमेडी को न जाने कितनी बार दिखायाँ जाता है क्यों ?क्या कभी दिखाया है की छोटे छोटे गाँव में लोगो कैसे रहे रहे है उन्हें बारिश से क्या समस्यां हो रही होंगी ।





मैं तो मीडिया से यही कहना चाहूँगा कि TRP बढाने के लिये वह कॉमेडी, छोटे परदे की बातें , क्रिकेट का सहारा न लें बल्कि आम आदमी बनकर खुफिया केमरों के साथ खुलासे करें जिससे सभी ग़लत व्यापार करने वाले मीडिया के भय से ग़लत व्यापर करना छोड़ दे । पुलिस या अन्य अधिकारी रिश्वत लेना छोड़ दे। नेता सोच समझकर बोलें , तथा प्रशाशन कोई लापरवाही न बरतें । किसी भी कॉमेडियन को मीडिया पर कॉमेडी करने का मोका न मिलें । बॉलीवुड , क्रिकेट की ख़बरों या उन पर विचार विमर्श करने से ज्यादा पॉलिटिक्स और इस देश के लिये विचार विमर्श करें । सभी मीडिया पर १०० % विश्वास करें । इस देश से भ्रस्टाचार मिटें । चारो तरफ मीडिया का ही बोलबाला हो। और कोई मीडिया पर अंगुली न उठा सके। अपनी छमता का प्रयोग करें । अपनी शक्ति को पहचानें ।

WRITTEN BY
HARSHIT GUPTA (हर्षित गुप्ता )


आप मीडिया के बारे में क्या समझते हैं ? अवश्य लिखें ।

4 comments:

  1. I consider indian media to be corrupt like ministers.

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  2. I apereciate with your topic MEDIA which you write on your blog and now i pray to god that everybody will read this topic and belive on media and change his views on media .

    Ankit Kumar

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  3. gud job done buddy keep it up
    chk it out http://dextersays2u.blogspot.com

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  4. मीडिया....अच्छी बातों की अपेक्षा दिमागी जंक फ़ूड ज्यादा परोसती है,आदमी की मानसिकता को अच्छी नशीली दवाएं देती है,.......गलत मानसिकता को भुनाती है मीडिया

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